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ऑनलाइन धोखाधड़ी के शिकार हुए हैं?

साइबर अपराध की शिकायत, पैसा फ्रीज़ कराने और वापस पाने के तुरंत कदम, और साइबर पुलिस व अदालत में प्रतिनिधित्व की जानकारी।

ऑनलाइन धोखाधड़ी बहुत तेज़ी से होती है: नकली बैंक या कूरियर कॉल, UPI पर "कलेक्ट" रिक्वेस्ट, निवेश और टास्क स्कैम, नकली "डिजिटल अरेस्ट" वीडियो कॉल, और ऐसे लिंक जो कार्ड की जानकारी चुरा लेते हैं। अगर आपके खाते से पैसा निकल गया है, तो पहले कुछ घंटे सबसे ज़रूरी होते हैं, क्योंकि पैसा अक्सर कुछ ही मिनटों में कई खातों से होकर आगे भेज दिया जाता है।

तुरंत ये करें

  1. 1930 पर कॉल करें, जो राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन है, और लेन-देन का विवरण दें। वे बैंकों को पैसा रोकने के लिए सूचित कर सकते हैं।
  2. cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें और पावती (acknowledgement) नंबर नोट कर लें।
  3. अपने बैंक को लिखित में सूचना दें और कार्ड, UPI व नेट बैंकिंग ब्लॉक कराएँ। अनधिकृत लेन-देन पर RBI के नियमों के तहत जल्दी सूचना देने से आपकी देनदारी सीमित हो सकती है।
  4. सबूत सुरक्षित रखें: चैट के स्क्रीनशॉट, कॉल लॉग, धोखेबाज़ का नंबर या प्रोफ़ाइल, लिंक और बैंक के SMS अलर्ट।

कानून क्या कहता है

ऑनलाइन धोखाधड़ी सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के अंतर्गत आती है, जिसमें पहचान की चोरी (धारा 66C) और कंप्यूटर संसाधन का उपयोग करके छद्म रूप से धोखाधड़ी (धारा 66D) शामिल हैं। साथ ही भारतीय न्याय संहिता, 2023 के धोखाधड़ी के प्रावधान (धारा 318 और 319) भी लागू होते हैं।

अपना पैसा वापस पाना

जब पुलिस पैसा पाने वाले खातों में रकम फ्रीज़ करती है, तो वह अपने आप वापस नहीं आती। आमतौर पर शिकायत और बैंक रिकॉर्ड के साथ अदालत में आवेदन करना पड़ता है ताकि फ्रीज़ की गई रकम पीड़ित को लौटाई जाए। गुरुग्राम के साइबर थाने में लगातार संपर्क रखना और बड़ी रकम होने पर FIR दर्ज कराने पर ज़ोर देना भी मदद करता है।

इन बातों से बचें

  • जो कोई फ़ीस लेकर आपका पैसा "रिकवर" करवाने का दावा करे, उसे कभी पैसे न दें; यह अक्सर दूसरा धोखा होता है।
  • OTP, स्क्रीन एक्सेस या कार्ड की जानकारी कभी साझा न करें, चाहे सामने वाला खुद को पुलिस या बैंक का बताए।
  • "डिजिटल अरेस्ट" जैसी कोई चीज़ नहीं होती। असली पुलिस किसी को वीडियो कॉल पर नहीं रोकती और केस बंद करने के लिए पैसे नहीं माँगती।

इसमें किस तरह सहायता मिल सकती है

  • पूरी शिकायत तैयार करना और साइबर पुलिस के पास उसकी पैरवी
  • फ्रीज़ की गई रकम आपको लौटाने के लिए अदालत में आवेदन
  • मामला ट्रायल तक जाए तो प्रतिनिधित्व
अधिवक्ता आशुतोष हंस अपने मामले की संक्षिप्त जानकारी और बात करने का सुविधाजनक समय बताएँ।

यह पेज कानून की सामान्य जानकारी है, आपकी स्थिति के लिए कानूनी सलाह नहीं। कानून और प्रक्रियाएँ बदलती रहती हैं; अपने तथ्यों पर सलाह अवश्य लें। Read this page in English

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