अधिवक्ता आशुतोष हंस

अधिवक्ता

आशुतोष हंस


आपराधिक मामलों में बचाव, अग्रिम और नियमित जमानत, साइबर अपराध और EOW मामले, साथ ही चेक बाउंस, संपत्ति और पारिवारिक विवाद। ज़िला एवं सत्र न्यायालय, गुरुग्राम और दिल्ली NCR में वकालत।

सोमवार से शनिवार, सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक (पहले से समय लेकर)

किसी कानूनी समस्या का सामना कर रहे हैं?

ये वे स्थितियाँ हैं जिनमें लोग सबसे अधिक सलाह लेने आते हैं। हर विषय पर हिन्दी में विस्तृत जानकारी पढ़ें; आपकी स्थिति मिलती-जुलती हो तो एक छोटी बातचीत से यह समझने में मदद मिल सकती है कि आप कहाँ खड़े हैं।

इन अदालतों में पेश होते हैं

  • ज़िला एवं सत्र न्यायालय, गुरुग्राम
  • तीस हज़ारी कोर्ट, दिल्ली
  • पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय
  • दिल्ली उच्च न्यायालय

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आप क्या उम्मीद कर सकते हैं

पहली बातचीत से लेकर अंतिम आदेश तक, हर मामले को एक जैसी सावधानी और ध्यान मिलता है।

  • पहली मुलाकात से स्पष्ट सलाह

    कोई भी कदम उठाने से पहले आपको साफ़ बताया जाता है कि कानून में आपकी स्थिति क्या है, आपके पास क्या विकल्प हैं, अनुमानित समय कितना लगेगा और हर रास्ते के जोखिम क्या हैं।

  • ज़रूरी मामलों को प्राथमिकता

    गिरफ्तारी या उसका डर, फ्रीज़ बैंक खाते और तुरंत स्टे के आवेदन प्राथमिकता से लिए जाते हैं, क्योंकि ऐसे मामलों में एक दिन की देरी भी मायने रखती है।

  • पूरी तैयारी

    अदालत में कुछ भी दाखिल करने या दूसरे पक्ष को भेजने से पहले हर तथ्य और दस्तावेज़ की जाँच की जाती है, और मौजूदा कानून व हाल के फ़ैसले देखे जाते हैं।

  • हर स्तर पर प्रतिनिधित्व

    थाने और ट्रायल कोर्ट से लेकर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय तक, आपका मामला हर उस मंच तक ले जाया जा सकता है जहाँ उसे जाना हो।

  • नियमित जानकारी

    हर सुनवाई के बाद आपको बताया जाता है कि क्या हुआ और आगे क्या होगा, ताकि आपको अपने मामले की स्थिति का अंदाज़ा न लगाना पड़े।

  • पूरी गोपनीयता

    आप जो कुछ भी बताते हैं, वह भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 132 के तहत अधिवक्ता–मुवक्किल विशेषाधिकार से सुरक्षित रहता है।

परिचय

आशुतोष हंस ज़िला एवं सत्र न्यायालय, गुरुग्राम और तीस हज़ारी कोर्ट, दिल्ली में वकालत करते हैं, और पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय तथा दिल्ली उच्च न्यायालय में पेश होते हैं।

उनकी वकालत मुख्य रूप से आपराधिक कानून पर केंद्रित है: अग्रिम और नियमित जमानत, FIR और जाँच के चरण में सलाह, ट्रायल में बचाव, आपराधिक पुनरीक्षण और FIR रद्द (क्वैश) कराने की याचिकाएँ। साइबर अपराध के मामले, जैसे ऑनलाइन धोखाधड़ी में गया पैसा वापस पाने की शिकायतें और साइबर सेल द्वारा फ्रीज़ किए गए बैंक खातों को छुड़ाने के आवेदन, और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के धोखाधड़ी व निवेश घोटाले के मामले भी उनके काम का बड़ा हिस्सा हैं।

सिविल मामलों में वे कब्ज़ा, अवैध निर्माण और विवादित संपत्ति की बिक्री के विरुद्ध तुरंत निषेधाज्ञा (स्टे) और मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) के मामले देखते हैं। साथ ही चेक बाउंस, संपत्ति, पारिवारिक व वैवाहिक विवाद, वसूली के मुकदमे, RERA, उपभोक्ता और रिट मामले भी लेते हैं।

उनका तरीका सीधा है: कोई भी कदम उठाने से पहले कानूनी स्थिति और विकल्प सरल भाषा में समझाना, हर दस्तावेज़ सावधानी से तैयार करना, और हर चरण पर मुवक्किल को जानकारी देते रहना।

संपर्क और चैंबर

गुरुग्राम चैंबर नं. 146, एसबीएस ब्लॉक ज़िला एवं सत्र न्यायालय, गुरुग्राम, हरियाणा 122001
दिल्ली चैंबर नं. 193, वेस्टर्न विंग तीस हज़ारी कोर्ट, दिल्ली
फ़ोन और ईमेल 8447953090 ashutoshhansadv@gmail.com सोमवार से शनिवार, सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक (पहले से समय लेकर)

WhatsApp कॉल करें संपर्क फ़ॉर्म (अंग्रेज़ी)

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