← सभी कानूनी विषय

दहेज या क्रूरता (498A) का मामला?

वैवाहिक विवादों से जुड़े दहेज, क्रूरता और घरेलू हिंसा के मामलों में अग्रिम जमानत और बचाव की जानकारी।

जब विवाह टूटता है, तो अक्सर पति और उसके परिवार के खिलाफ क्रूरता या दहेज माँगने की आपराधिक शिकायतें दर्ज कराई जाती हैं। ये गंभीर आरोप हैं, लेकिन कानून में अपने आप गिरफ्तारी के खिलाफ और बढ़ा-चढ़ाकर लगाए गए या दुरुपयोग वाले मामलों के खिलाफ सुरक्षा के उपाय भी हैं।

आमतौर पर लगने वाले प्रावधान

  • पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता: भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 85 और 86 (पहले IPC धारा 498A)।
  • दहेज मृत्यु: BNS धारा 80 (पहले IPC धारा 304B)।
  • दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 के तहत अपराध।
  • घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत कार्यवाही, जो सिविल प्रकृति की है लेकिन अक्सर साथ-साथ चलती है।

गिरफ्तारी से सुरक्षा

  • अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य (2014) में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में गिरफ्तारी अपने आप नहीं होनी चाहिए; पुलिस को कारण दर्ज करने होंगे और आमतौर पर पहले पेश होने का नोटिस देना होगा।
  • परिवार के सदस्य, खासकर अलग रहने वाले रिश्तेदार, सत्र न्यायालय या उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।
  • पति के परिवार के हर सदस्य पर लगाए गए अस्पष्ट और सामान्य आरोपों को अदालतें सावधानी से देखती हैं।

समझौता और FIR रद्द कराना

जहाँ पक्षों में वास्तविक समझौता हो जाए, जिसमें आपसी सहमति से तलाक भी शामिल है, वहाँ उच्च न्यायालय FIR रद्द कर सकता है। अदालत या पुलिस के स्तर पर अक्सर मध्यस्थता (मीडिएशन) की कोशिश की जाती है।

इसमें किस तरह सहायता मिल सकती है

  • पति और परिवार के सदस्यों के लिए अग्रिम और नियमित जमानत
  • मध्यस्थता और जाँच के दौरान प्रतिनिधित्व
  • समझौते पर, या जहाँ आरोपों से अपराध न बनता हो, FIR रद्द कराने की याचिका
  • ट्रायल में बचाव, साथ में जुड़े तलाक, भरण-पोषण और कस्टडी के मामले
अधिवक्ता आशुतोष हंस अपने मामले की संक्षिप्त जानकारी और बात करने का सुविधाजनक समय बताएँ।

यह पेज कानून की सामान्य जानकारी है, आपकी स्थिति के लिए कानूनी सलाह नहीं। कानून और प्रक्रियाएँ बदलती रहती हैं; अपने तथ्यों पर सलाह अवश्य लें। Read this page in English

अन्य कानूनी विषय