गुरुग्राम में संपत्ति के विवाद पारिवारिक बँटवारे और सीमा विवाद से लेकर अवैध कब्ज़े, बिल्डर विवाद और धोखे से की गई बिक्री तक होते हैं। जल्दी कदम उठाना और सही दस्तावेज़ होना बहुत फ़र्क डालता है।
आम मामले
- कब्ज़ा, बँटवारा और स्वामित्व की घोषणा के मुकदमे
- अवैध निर्माण, बेदखली या बिक्री रोकने के लिए निषेधाज्ञा
- धोखे से बने बैनामे और दस्तावेज़ रद्द कराना
- किरायेदारों से विवाद, जिसमें बेदखली और किराये की वसूली शामिल है
- खरीदने से पहले टाइटल की जाँच और ड्यू डिलिजेंस
संपत्ति खरीदने से पहले
- स्वामित्व के दस्तावेज़ों की पूरी श्रृंखला और इंतक़ाल (म्यूटेशन) रिकॉर्ड जाँचें।
- लोन, चार्ज, लंबित मुकदमे और स्वीकृतियाँ जाँचें।
- भुगतान करने से पहले इकरारनामा और बैनामा जँचवा लें।
समय-सीमा
परिसीमा अधिनियम, 1963 के तहत संपत्ति के अलग-अलग दावों की समय-सीमा अलग होती है। उदाहरण के लिए, स्वामित्व के आधार पर कब्ज़े के मुकदमे की अवधि लंबी है, लेकिन दूसरे दावों की अवधि काफ़ी कम होती है, इसलिए सलाह लेने में देरी न करें।
इसमें किस तरह सहायता मिल सकती है
आपके दस्तावेज़ों की समीक्षा करके सबसे उपयुक्त उपाय की सलाह दी जाती है, और सिविल अदालतों में प्रतिनिधित्व किया जाता है, जिसमें कब्ज़े या निर्माण का खतरा होने पर तुरंत निषेधाज्ञा भी शामिल है।