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पुलिस आपकी FIR दर्ज नहीं कर रही?

जब पुलिस शिकायत दर्ज करने से मना करे: पुलिस अधीक्षक, मजिस्ट्रेट और उच्च न्यायालय के कानूनी उपायों की जानकारी।

अगर आप किसी संज्ञेय अपराध की सूचना देते हैं, जैसे चोरी, धोखाधड़ी, मारपीट या धमकी, तो पुलिस को आमतौर पर FIR दर्ज करनी होती है। सर्वोच्च न्यायालय ने ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार (2014) में यह स्पष्ट किया है। फिर भी शिकायतों में अक्सर देरी होती है या उन्हें दर्ज करने से मना कर दिया जाता है। कानून आपको कई उपाय देता है।

आपके विकल्प, चरण दर चरण

  1. थाने में लिखित शिकायत दें और उसकी रिसीविंग कॉपी रखें। आप ई-FIR या किसी भी थाने में ज़ीरो FIR भी दर्ज करा सकते हैं, जिसे बाद में क्षेत्राधिकार वाले थाने को भेजा जाता है (BNSS धारा 173(1))।
  2. पुलिस अधीक्षक / पुलिस आयुक्त को लिखें अगर थाना मना कर दे (BNSS धारा 173(4))। वरिष्ठ अधिकारी खुद जाँच कर सकते हैं या जाँच का निर्देश दे सकते हैं।
  3. मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन करें, BNSS की धारा 175(3) (पहले CrPC की धारा 156(3)) के तहत, FIR दर्ज करने और जाँच का निर्देश माँगते हुए। आवेदन के साथ शपथ-पत्र होना चाहिए और यह दिखाना चाहिए कि आप पहले वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के पास गए थे।
  4. मजिस्ट्रेट के समक्ष निजी शिकायत (परिवाद) दायर करें, BNSS की धारा 223 के तहत, जिसमें अदालत खुद शिकायत और गवाहों की जाँच करती है।
  5. उपयुक्त मामलों में उच्च न्यायालय जाया जा सकता है।

प्रारंभिक जाँच

तीन से सात साल तक की सज़ा वाले अपराधों में पुलिस FIR दर्ज करने का फ़ैसला करने से पहले 14 दिन के भीतर पूरी होने वाली एक छोटी प्रारंभिक जाँच कर सकती है (BNSS धारा 173(3))।

मज़बूत शिकायत के लिए सुझाव

  • तथ्य क्रम से लिखें, तारीख, जगह, रकम और नामों के साथ।
  • दस्तावेज़ों, स्क्रीनशॉट और बैंक रिकॉर्ड की प्रतियाँ लगाएँ।
  • दी गई हर शिकायत का प्रमाण रखें, जिसमें ईमेल और डाक की रसीदें शामिल हैं।

इसमें किस तरह सहायता मिल सकती है

स्पष्ट शिकायत तैयार की जाती है, वरिष्ठ अधिकारियों के पास उसकी पैरवी की जाती है, और मजिस्ट्रेट या उच्च न्यायालय में आवेदन दायर किए जाते हैं ताकि आपकी शिकायत दर्ज हो और उसकी जाँच हो।

अधिवक्ता आशुतोष हंस अपने मामले की संक्षिप्त जानकारी और बात करने का सुविधाजनक समय बताएँ।

यह पेज कानून की सामान्य जानकारी है, आपकी स्थिति के लिए कानूनी सलाह नहीं। कानून और प्रक्रियाएँ बदलती रहती हैं; अपने तथ्यों पर सलाह अवश्य लें। Read this page in English

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