धोखाधड़ी के मामले संपत्ति और निवेश घोटालों से लेकर ऐसे व्यावसायिक साझेदारों तक होते हैं जो पैसा लेकर काम पूरा नहीं करते। गुरुग्राम में बड़े या जटिल धोखाधड़ी के मामले अक्सर पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) देखती है। चाहे आप पीड़ित हों या आप पर आरोप लगा हो, ऐसे मामलों में दस्तावेज़ और पैसे का रास्ता (मनी ट्रेल) ही निर्णायक होते हैं।
कौन-से अपराध लगते हैं
- धोखाधड़ी (BNS धारा 318; पहले IPC धारा 420)
- आपराधिक विश्वासघात (BNS धारा 316; पहले IPC धारा 406)
- जालसाज़ी और जाली दस्तावेज़ों का उपयोग (BNS धारा 336 से 340)
- आपराधिक षड्यंत्र (BNS धारा 61; पहले IPC धारा 120B)
अगर आपके साथ धोखा हुआ है
- भुगतान, किए गए वादों और जो गलत हुआ, उसके सबूत इकट्ठा करें: अनुबंध, रसीदें, बैंक ट्रांसफ़र, संदेश।
- पुलिस या EOW में साफ़ और दस्तावेज़ों से भरी शिकायत दें। मज़बूत शिकायत से FIR दर्ज होने और पैसे के रास्ते की जाँच की संभावना बढ़ती है।
- साथ में सिविल उपायों पर भी विचार करें, जैसे वसूली का मुकदमा या संपत्ति हटाए जाने से रोकने के लिए निषेधाज्ञा।
अगर आप पर आरोप लगा है
- हर असफल सौदा धोखाधड़ी नहीं होता। अपराध के लिए लेन-देन की शुरुआत में ही बेईमानी का इरादा ज़रूरी है; केवल बाद में अनुबंध टूटना आमतौर पर सिविल मामला होता है।
- जहाँ सिविल विवाद को आपराधिक मामला बना दिया गया हो, वहाँ FIR को उच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है।
- समय पर अग्रिम जमानत लेकर गिरफ्तारी से बचाव करें, और नोटिस का जवाब अपने पक्ष के दस्तावेज़ों के साथ दें।
इसमें किस तरह सहायता मिल सकती है
ऐसी शिकायतें तैयार की जाती हैं जिनमें तथ्य और पैसे का रास्ता साफ़ दिखे, पुलिस और अदालत में शिकायतकर्ता का प्रतिनिधित्व किया जाता है, और धोखाधड़ी व EOW मामलों में आरोपित व्यक्तियों का बचाव किया जाता है, जिसमें जमानत, FIR रद्द कराना और ट्रायल शामिल हैं।