पारिवारिक मामले
क्या पति या पत्नी को धोखा देना भारत में अपराध है? व्यभिचार, तलाक, भरण-पोषण और कस्टडी
बहुत-से लोग अब भी मानते हैं कि धोखा देने वाले पति या पत्नी के खिलाफ़ FIR हो सकती है। 2018 से भारत में व्यभिचार (adultery) अपराध नहीं है। लेकिन तलाक, भरण-पोषण और कभी-कभी कस्टडी में यह अब भी बहुत मायने रखता है। कानून अब क्या कहता है, और वे गलतियाँ जो पीड़ित पति या पत्नी को ही आरोपी बना सकती हैं।
"मेरे पति का किसी से संबंध है। क्या मैं FIR कर सकती हूँ?" "मेरी पत्नी किसी और से मिलती है। क्या उस आदमी को जेल हो सकती है?" वैवाहिक विवादों में ये सबसे आम सवाल हैं, और इनका जवाब ज़्यादातर लोगों को चौंकाता है। कानून आज यह कहता है।
व्यभिचार अब अपराध नहीं है
जोसेफ़ शाइन बनाम भारत संघ (2018) में सुप्रीम कोर्ट की पाँच जजों की संविधान पीठ ने भारतीय दंड संहिता की धारा 497 रद्द कर दी, जो व्यभिचार को अपराध बनाती थी। अदालत ने कहा कि यह प्रावधान मनमाना था, महिला को पति की संपत्ति की तरह मानता था, और समानता व गरिमा के अधिकारों का उल्लंघन करता था। IPC की जगह लेने वाली भारतीय न्याय संहिता, 2023 में भी व्यभिचार का कोई अपराध नहीं है। इसलिए सहमति से दो वयस्कों के बीच विवाहेतर संबंध, अपने आप में, पुलिस का मामला नहीं है।
एक अपवाद जानने लायक है: 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 2018 का फ़ैसला सशस्त्र बलों के सदस्यों के खिलाफ़ उनके सेवा कानूनों के तहत ऐसे आचरण पर अनुशासनात्मक कार्रवाई को नहीं रोकता।
लेकिन यह अब भी तलाक का आधार है
व्यभिचार को अपराध से बाहर करने का मतलब यह नहीं कि विवाह में इसका कोई महत्व नहीं। हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (धारा 13(1)(i)), विशेष विवाह अधिनियम, 1954 और अन्य विवाह कानूनों के तहत, शादी के बाद अपने जीवनसाथी के अलावा किसी और के साथ स्वेच्छा से शारीरिक संबंध अब भी वह आधार है जिस पर दूसरा पक्ष तलाक माँग सकता है। आरोप लगाने वाले को इसे साबित करना होता है, आम तौर पर परिस्थितिजन्य सबूतों से, क्योंकि सीधा सबूत कम ही मिलता है। अदालत शक या अफ़वाह नहीं, तथ्यों की भरोसेमंद कड़ी देखती है।
भरण-पोषण पर असर पड़ सकता है
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 144(4) (पहले धारा 125(4) CrPC) के तहत, अगर पत्नी "व्यभिचार में रह रही है" तो वह पति से भरण-पोषण की हकदार नहीं है। अदालतों ने आम तौर पर इसका मतलब लगातार चलने वाला संबंध माना है, एक बार की गलती नहीं, और इसे साबित करना होता है। बच्चे के भरण-पोषण का अधिकार किसी भी माता-पिता के आचरण से प्रभावित नहीं होता।
कस्टडी बच्चे के हित पर निर्भर है
कस्टडी के मामलों में सबसे ऊपर बच्चे का कल्याण है। सिर्फ़ विवाहेतर संबंध से यह तय नहीं होता कि कस्टडी किसे मिलेगी। अदालत बच्चे की स्थिरता, पढ़ाई, भावनात्मक जुड़ाव, और कौन बेहतर देखभाल कर सकता है, यह देखती है। आचरण तभी मायने रखता है जब उसका असर बच्चे पर पड़ता हो।
वे गलतियाँ जो आपको ही आरोपी बना सकती हैं
जब शादी टूटती है, तो गुस्सा और शक लोगों को ऐसे कदमों की ओर धकेल सकते हैं जो खुद अपराध हैं:
- पति या पत्नी का फ़ोन, ईमेल या सोशल मीडिया हैक करना सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत अपराध हो सकता है, जिसमें अनधिकृत पहुँच (धारा 43 और 66) शामिल है।
- चोरी-छिपे निजी तस्वीरें लेना या शेयर करना IT Act की धारा 66E के तहत अपराध है और धारा 77 BNS के तहत दृश्यरतिकता हो सकता है।
- बदनाम करने के लिए ऑनलाइन आरोप पोस्ट करना धारा 356 BNS के तहत मानहानि का मामला बन सकता है।
- पति, पत्नी या तीसरे व्यक्ति को धमकी देना धारा 351 BNS के तहत आपराधिक धमकी है।
गैरकानूनी तरीके से जुटाए गए सबूत अदालत में भी दिक्कत पैदा कर सकते हैं। कानूनी तरीके से अपना मामला साबित करने के लिए सलाह लेना कहीं बेहतर है।
अगर दोनों अलग होना चाहते हैं: आपसी सहमति से तलाक
जब दोनों पक्ष मान लें कि शादी खत्म हो चुकी है, तो कम से कम एक साल अलग रहने के बाद वे आपसी सहमति से तलाक माँग सकते हैं (उदाहरण के लिए, हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13B के तहत)। सुप्रीम कोर्ट ने अमरदीप सिंह बनाम हरवीन कौर (2017) में कहा कि दोनों अर्ज़ियों के बीच छह महीने की प्रतीक्षा अवधि उपयुक्त मामलों में अदालत माफ़ कर सकती है। 2023 में शिल्पा शैलेश बनाम वरुण श्रीनिवासन में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विवाह के पूरी तरह टूट जाने के आधार पर उसे भंग कर सकता है। भरण-पोषण, कस्टडी और संपत्ति आपसी समझौते से तय करना आम तौर पर लंबी लड़ाई से तेज़, सस्ता और बच्चों के लिए कम दुखदायी होता है।
अधिवक्ता आशुतोष हंस · https://ashutoshhans.in/blog/kya-pati-ya-patni-ko-dhokha-dena-bharat-men-aparadh-hai-vyabhichar-talak-bharan-poshan-aur
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और कानूनी सलाह नहीं है। कानून और उसकी व्याख्या बदलती रहती है; अपनी स्थिति पर सलाह के लिए संपर्क करें.