मध्यस्थता
गुरुग्राम में मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) क्लॉज़ वाला व्यापारिक विवाद? धारा 9 के तहत अदालत से तुरंत सुरक्षा कैसे लें
अनुबंध में मध्यस्थता क्लॉज़ होने का मतलब यह नहीं कि आपको तुरंत मदद नहीं मिल सकती। मध्यस्थता और सुलह अधिनियम की धारा 9 के तहत अदालत मध्यस्थता से पहले और उसके दौरान पैसा, संपत्ति या सबूत कैसे सुरक्षित कर सकती है, और किन समय-सीमाओं का ध्यान रखें।
यह लेख अंग्रेज़ी में पढ़ें →गुरुग्राम में बहुत-से व्यापारिक समझौतों, वेंडर अनुबंधों, साझेदारी विलेखों (partnership deed) और बिल्डर एग्रीमेंट में मध्यस्थता क्लॉज़ (arbitration clause) होता है। जब विवाद होता है, तो लोग अक्सर मान लेते हैं कि इस क्लॉज़ की वजह से वे अदालत जा ही नहीं सकते, और जब तक मध्यस्थ (arbitrator) नियुक्त नहीं होता, तब तक कुछ नहीं हो सकता, जिसमें हफ्ते या महीने लग सकते हैं। इस बीच दूसरा पक्ष स्टॉक बेच सकता है, खातों से पैसा निकाल सकता है, संपत्ति ट्रांसफर कर सकता है या बैंक गारंटी भुना सकता है।
कानून ने ठीक इसी समस्या का ध्यान रखा है। मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 (Arbitration and Conciliation Act, 1996) की धारा 9 मध्यस्थता समझौते के किसी भी पक्ष को अदालत से तुरंत अंतरिम सुरक्षा माँगने की अनुमति देती है, यहाँ तक कि मध्यस्थता शुरू होने से पहले भी। यह लेख बताता है कि यह कैसे काम करता है।
धारा 9 क्या अनुमति देती है
धारा 9 के तहत कोई पक्ष मध्यस्थता की कार्यवाही शुरू होने से पहले, कार्यवाही के दौरान, या अवार्ड (award) हो जाने के बाद लेकिन उसके लागू होने से पहले, अदालत से अंतरिम उपाय (interim measures) माँग सकता है। अदालत कई तरह के सुरक्षात्मक आदेश दे सकती है, जैसे:
- विवाद से जुड़े सामान या संपत्ति को सुरक्षित रखना;
- विवादित राशि को सुरक्षित करना, जैसे दूसरे पक्ष को पैसा जमा करने या सिक्योरिटी देने का निर्देश;
- दूसरे पक्ष को संपत्ति बेचने, ट्रांसफर करने या उसमें किसी तीसरे व्यक्ति के अधिकार बनाने से रोकना;
- संपत्ति या व्यापारिक परिसंपत्ति की देखरेख के लिए रिसीवर (receiver) नियुक्त करना;
- दस्तावेज़, डेटा या अन्य सबूत सुरक्षित रखना; और
- कोई भी अन्य अंतरिम सुरक्षा उपाय जो अदालत को न्यायसंगत और उचित लगे।
असल में, धारा 9 मध्यस्थता के मामलों में वही काम करती है जो दीवानी मुकदमे में अस्थायी निषेधाज्ञा (temporary injunction) करती है। अगर मामला खास तौर पर संपत्ति का है, तो संपत्ति पर निर्माण या बिक्री होने पर तुरंत स्टे लेने पर हमारा लेख भी उपयोगी हो सकता है।
धारा 9 का इस्तेमाल आमतौर पर कब होता है?
- कोई सप्लायर या डिस्ट्रीब्यूटर काम बंद कर चुका है और स्टॉक या परिसंपत्तियाँ इधर-उधर कर रहा है।
- कोई व्यापारिक साझेदार फंड निकाल रहा है या कंपनी की परिसंपत्तियाँ ट्रांसफर कर रहा है।
- विवादित अनुबंध में एक पक्ष बैंक गारंटी लागू करने या भुनाने की धमकी दे रहा है।
- कोई बिल्डर या डेवलपर विवादित प्रोजेक्ट में यूनिट बेच रहा है या तीसरे व्यक्तियों के अधिकार बना रहा है।
- ज़रूरी रिकॉर्ड, डेटा या मशीनरी मध्यस्थ के देखने से पहले नष्ट या हटाई जा सकती है।
किस अदालत में जाएँ?
घरेलू मध्यस्थता (domestic arbitration) में आवेदन आमतौर पर उस ज़िले की मूल अधिकार-क्षेत्र वाली प्रधान दीवानी अदालत (principal civil court of original jurisdiction) में दायर किया जाता है, जहाँ विवाद का विषय स्थित है या जहाँ वाद-कारण (cause of action) पैदा हुआ, जब तक कि समझौता वैध रूप से किसी और जगह को सीट (seat) तय न करता हो। अगर विवाद वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम, 2015 (Commercial Courts Act, 2015) के अर्थ में वाणिज्यिक विवाद है, तो आवेदन की सुनवाई नामित वाणिज्यिक न्यायालय (Commercial Court) करता है। अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता में आवेदन हाई कोर्ट में होता है।
आपके समझौते का सीट या वेन्यू क्लॉज़ यहाँ बहुत मायने रखता है। अगर अनुबंध में किसी खास शहर को मध्यस्थता की सीट बताया गया है, तो आमतौर पर उसी जगह की अदालतों को अधिकार-क्षेत्र होगा, और कहीं और दायर करने पर आवेदन लौटाया जा सकता है।
अदालत क्या देखती है
अदालतें वही मोटे सिद्धांत लागू करती हैं जो अस्थायी निषेधाज्ञा पर लागू होते हैं:
- प्रथम दृष्टया मामला (prima facie case): क्या कोई वैध मध्यस्थता समझौता है और तय करने लायक गंभीर दावा है?
- सुविधा का संतुलन (balance of convenience): क्या सुरक्षा न देने से आपको उतना ज़्यादा नुकसान होगा, जितना सुरक्षा देने से दूसरे पक्ष को होगा?
- अपूरणीय क्षति (irreparable injury): क्या नुकसान को बाद में ठीक करना या उसकी भरपाई करना मुश्किल होगा, जैसे अवार्ड होने तक परिसंपत्तियाँ खत्म हो चुकी होंगी?
जहाँ दावा पैसे का है, वहाँ अदालत आमतौर पर ऐसी कुछ सामग्री देखना चाहती है जिससे लगे कि दूसरा पक्ष भविष्य के अवार्ड को बेअसर करने के लिए अपनी परिसंपत्तियाँ हटा या खत्म कर सकता है। बिना तथ्यों के केवल आशंका अक्सर काफी नहीं होती।
सचमुच तात्कालिक स्थितियों में अदालत एकपक्षीय (ex parte) आदेश दे सकती है, यानी पहले दूसरे पक्ष को सुने बिना, और फिर मामले को पूरी सुनवाई के लिए लगा सकती है।
समय-सीमाएँ जिनका ध्यान रखना ज़रूरी है
90 दिनों के भीतर मध्यस्थता शुरू करें
अगर अदालत मध्यस्थता शुरू होने से पहले अंतरिम उपाय देती है, तो धारा 9(2) के अनुसार आदेश की तारीख से 90 दिनों के भीतर, या अदालत द्वारा दिए गए अतिरिक्त समय में, मध्यस्थता की कार्यवाही शुरू करनी होती है। मध्यस्थता आमतौर पर तब शुरू मानी जाती है जब दूसरे पक्ष को विवाद मध्यस्थता को भेजने का अनुरोध मिल जाता है (धारा 21)। अदालतें इस शर्त को गंभीरता से लेती हैं, और जो पक्ष सुरक्षा लेकर मध्यस्थता शुरू नहीं करता, उसका आदेश हटाया जा सकता है।
ट्रिब्यूनल बन जाने के बाद, ट्रिब्यूनल के पास जाएँ
मध्यस्थ ट्रिब्यूनल (arbitral tribunal) के गठन के बाद, धारा 9(3) के अनुसार अदालत आमतौर पर धारा 9 का आवेदन तब तक नहीं सुनेगी, जब तक कि ट्रिब्यूनल के सामने धारा 17 के तहत उपाय प्रभावी न हो। ट्रिब्यूनल को खुद अंतरिम उपाय देने का अधिकार है, और धारा 17 के तहत उसके आदेश अदालत के आदेश की तरह लागू करवाए जा सकते हैं।
धारा 9 विवाद का फैसला नहीं करती
यह समझना ज़रूरी है कि धारा 9 का आदेश क्या नहीं है। यह तय नहीं करता कि कौन सही है। यह केवल स्थिति को सुरक्षित रखता है ताकि अंतिम अवार्ड, चाहे वह किसी के भी पक्ष में हो, प्रभावी ढंग से लागू हो सके। मामले के गुण-दोष (merits) का फैसला मध्यस्थ करता है।
तैयार रखने वाले दस्तावेज़
- मध्यस्थता क्लॉज़ वाला समझौता, और उसमें बाद में हुए कोई संशोधन;
- विवाद दिखाने वाला पत्राचार, जिसमें भेजे और मिले नोटिस शामिल हों;
- इनवॉइस, लेजर, बैंक स्टेटमेंट और भुगतान के रिकॉर्ड;
- जिस कदम की धमकी दी जा रही है उसका सबूत, जैसे मैसेज, बिक्री के विज्ञापन, बोर्ड प्रस्ताव या बैंक गारंटी लागू करने के पत्र; और
- उन परिसंपत्तियों या संपत्ति का विवरण, जिन्हें आप सुरक्षित करवाना चाहते हैं।
अधिवक्ता आशुतोष हंस · https://ashutoshhans.in/blog/gurugram-men-madhyasthata-aarbitreshan-kloz-vala-vyaparik-vivad-dhara-9-ke-tahat-adalat-se
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और कानूनी सलाह नहीं है। कानून और उसकी व्याख्या बदलती रहती है; अपनी स्थिति पर सलाह के लिए संपर्क करें.