पारिवारिक मामले
लिव-इन रिलेशनशिप, गर्लफ्रेंड और बॉयफ्रेंड: भारतीय कानून असल में क्या कहता है
क्या लिव-इन रिलेशनशिप कानूनी है? क्या लिव-इन पार्टनर भरण-पोषण माँग सकता है? रिश्ता कब आपराधिक मामला बन जाता है? लिव-इन अधिकार, सहमति की उम्र, शादी का झूठा वादा, ब्रेकअप, ब्लैकमेल और निजता पर भारतीय कानून की सरल जानकारी।
शादी के बाहर रिश्ते आम हैं, लेकिन ज़्यादातर जोड़ों को कभी बताया ही नहीं गया कि कानून इनके बारे में क्या कहता है, जब तक कुछ गलत न हो जाए। ये हैं सबसे ज़रूरी बातें।
वयस्कों के बीच लिव-इन रिलेशनशिप गैरकानूनी नहीं है
सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार कहा है कि बिना शादी साथ रहने वाले दो वयस्क कोई अपराध नहीं करते। साथी चुनना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा है (उदाहरण: लता सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, 2006, और एस. खुशबू बनाम कन्नियम्मल, 2010)। परिवार से धमकी झेल रहे जोड़ों को अदालतों ने सुरक्षा भी दी है। कुछ राज्यों ने अपने नियम बनाए हैं: उदाहरण के लिए, उत्तराखंड की समान नागरिक संहिता उस राज्य में लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण ज़रूरी करती है।
लिव-इन रिलेशनशिप में अधिकार
- घरेलू हिंसा से सुरक्षा। "विवाह जैसे संबंध" में रह रही महिला घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत सुरक्षा, निवास और आर्थिक राहत माँग सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हर लिव-इन इसमें नहीं आता: अदालत रिश्ते की अवधि, साझा घर, साझा संसाधन, और क्या जोड़ा समाज के सामने पति-पत्नी की तरह रहा, जैसी बातें देखती है (डी. वेलुसामी बनाम डी. पचैअम्मल, 2010; इंद्रा सरमा बनाम वी.के.वी. सरमा, 2013)।
- बच्चे। अदालतों ने माना है कि लंबे, स्थिर लिव-इन रिश्ते से जन्मे बच्चे को नाजायज़ नहीं माना जाएगा और वह माता-पिता की संपत्ति में हिस्सा पा सकता है। बच्चा हर हाल में माता-पिता से भरण-पोषण का हकदार है।
18 से कम उम्र में सहमति मायने नहीं रखती
18 साल से कम उम्र के व्यक्ति के साथ कोई भी यौन कृत्य लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम, 2012 के तहत अपराध है, रिश्ता कैसा भी हो और भले दोनों कहें कि वे "प्यार में" हैं। कई किशोर रिश्ते POCSO मामलों में बदल जाते हैं क्योंकि परिवार और जोड़े यह नहीं जानते।
शादी का झूठा वादा अब एक विशेष अपराध है
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 69 उस पुरुष को सज़ा देती है जो धोखे से, या शादी का ऐसा वादा करके जिसे निभाने का कोई इरादा न हो, किसी महिला से शारीरिक संबंध बनाता है। असली बात शुरुआत में इरादा है। सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार कहा है कि सच्चा, सहमति वाला रिश्ता जो बाद में टूट जाए, या ऐसा वादा जो असली कारणों से निभाया न जा सका, धोखा देने के लिए किए गए झूठे वादे जैसा नहीं है। ब्रेकअप अपने आप में अपराध नहीं है।
ब्रेकअप: कब सीमा पार होती है
- किसी को साथ रहने, पैसे देने या कुछ करने के लिए मजबूर करने को निजी फ़ोटो या वीडियो लीक करने की धमकी देना धारा 308 BNS के तहत उगाही (extortion) है, और उन्हें शेयर करना IT Act की धारा 66E (और स्पष्ट सामग्री में धारा 67 व 67A) के तहत अपराध है, और धारा 77 BNS के तहत दृश्यरतिकता हो सकता है।
- किसी महिला के साफ़ मना करने के बाद भी, ऑनलाइन सहित, बार-बार संपर्क करना धारा 78 BNS के तहत पीछा करना (stalking) है।
- धमकी देना धारा 351 BNS के तहत आपराधिक धमकी है।
- पार्टनर का फ़ोन या अकाउंट हैक करना IT Act की धारा 43 और 66 के तहत अपराध हो सकता है।
और शादी के भीतर
जोसेफ़ शाइन बनाम भारत संघ (2018) के बाद व्यभिचार अपराध नहीं है, लेकिन यह तलाक का आधार है और साबित होने पर लगातार संबंध की स्थिति में पत्नी के भरण-पोषण पर असर डाल सकता है। देखें: क्या पति या पत्नी को धोखा देना भारत में अपराध है?
अधिवक्ता आशुतोष हंस · https://ashutoshhans.in/blog/liv-in-rileshanaship-garlaphrend-aur-boyaphrend-bharatiy-kanun-asal-men-kya-kahata-hai
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और कानूनी सलाह नहीं है। कानून और उसकी व्याख्या बदलती रहती है; अपनी स्थिति पर सलाह के लिए संपर्क करें.