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आपराधिक प्रक्रिया

लुक आउट सर्कुलर की वजह से एयरपोर्ट पर रोक दिया गया? LOC का मतलब क्या है और इसे कैसे चुनौती दी जा सकती है (गुरुग्राम और हरियाणा)

लुक आउट सर्कुलर (LOC) आपको भारत से बाहर जाने से रोक सकता है, अक्सर बिना किसी पूर्व सूचना के। LOC क्या है, इसे कौन माँग सकता है, इसका पता अक्सर एयरपोर्ट पर ही क्यों चलता है, और इसकी समीक्षा कराने या इसे रद्द कराने के कानूनी रास्ते क्या हैं।

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बहुत-से लोगों को अपने खिलाफ़ लुक आउट सर्कुलर (Look Out Circular, LOC) का पता तभी चलता है जब एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन अधिकारी कहता है कि वे अपनी फ़्लाइट में नहीं जा सकते। यह बहुत झटका देने वाला पल होता है: टिकट बेकार हो जाता है, विदेश की नौकरी, परिवार से मिलना या बिज़नेस ट्रिप अचानक अटक जाती है, और अक्सर कोई कागज़ भी नहीं मिलता जिसमें वजह लिखी हो। गुरुग्राम में, जहाँ बहुत-से लोग काम के लिए विदेश जाते हैं और जहाँ धोखाधड़ी, ठगी और बैंक से जुड़ी शिकायतें आम हैं, यह स्थिति कोई दुर्लभ बात नहीं है।

यह लेख सरल भाषा में बताता है कि LOC क्या है, इसका पता आमतौर पर एयरपोर्ट पर ही क्यों चलता है, इसे कौन माँग सकता है, और किन कानूनी तरीकों से इसकी समीक्षा, इसमें बदलाव या इसे रद्द कराया जा सकता है।

लुक आउट सर्कुलर क्या है?

लुक आउट सर्कुलर इमिग्रेशन अधिकारियों के पास डाला गया एक अलर्ट है, ताकि कोई खास व्यक्ति जब भारत से बाहर जाने (या कभी-कभी भारत आने) की कोशिश करे तो उसकी पहचान हो सके। माँगने वाली एजेंसी ने क्या कहा है, उसके हिसाब से इमिग्रेशन उस व्यक्ति को बाहर जाने से रोक सकता है, उसे रोककर एजेंसी को सूचना दे सकता है, या बस उसकी आवाजाही की रिपोर्ट कर सकता है।

LOC अदालत का आदेश नहीं है और यह वारंट भी नहीं है। यह BNS या BNSS की किसी खास धारा के तहत जारी नहीं होता। यह एक प्रशासनिक (executive) कदम है, जो मुख्य रूप से गृह मंत्रालय (MHA) के कार्यालय ज्ञापनों (office memoranda) से चलता है; इसका मुख्य ढाँचा 2010 का है और उसके बाद इसमें कई बार बदलाव हुए हैं। क्योंकि यह किसी व्यक्ति की यात्रा की आज़ादी पर रोक लगाता है, इसलिए अदालतें इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से जुड़ा मानती हैं, और उन्होंने बार-बार कहा है कि इसे लापरवाही से जारी नहीं किया जाना चाहिए।

इसका पता आमतौर पर एयरपोर्ट पर ही क्यों चलता है

LOC आमतौर पर संबंधित व्यक्ति को बताए बिना जारी किया जाता है। इसके पीछे सोच यह है कि अगर व्यक्ति को पहले बता दिया गया तो वह अलर्ट सक्रिय होने से पहले ही देश छोड़ सकता है। इसलिए ज़्यादातर लोगों को पहली खबर इमिग्रेशन काउंटर पर मना किए जाने से ही मिलती है। कभी-कभी व्यक्ति को पहले भी पता चल जाता है, जैसे जब जाँच अधिकारी इसका ज़िक्र करे, या जब जमानत आदेश में या अदालत में दाखिल किसी जवाब में इसका उल्लेख हो।

LOC कौन माँग सकता है, और किन आधारों पर?

LOC किसी "मूल एजेंसी" (originating agency) की माँग पर जारी होता है, किसी निजी व्यक्ति की माँग पर नहीं। MHA के ढाँचे के तहत यह माँग पुलिस (ज़िला स्तर पर पुलिस अधीक्षक (Superintendent of Police) रैंक के अधिकारी), CBI, प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate), टैक्स और कस्टम्स विभाग, और अन्य सूचीबद्ध एजेंसियों के निर्धारित अधिकारियों की ओर से आ सकती है। कोई आपराधिक अदालत भी LOC खोलने का निर्देश दे सकती है। सरकारी बैंकों को भी कुछ स्थितियों में माँग करने की अनुमति दी गई थी, लेकिन ढाँचे के इस हिस्से को अदालतों में काफ़ी चुनौती दी गई है, जिसकी चर्चा नीचे है।

सामान्य तौर पर, LOC ऐसे व्यक्ति के लिए है जो किसी संज्ञेय अपराध (cognizable offence) में शामिल हो और जिसके गिरफ्तारी से बचने या अदालत में पेश न होने की संभावना हो, या असाधारण मामलों में जहाँ व्यक्ति का देश छोड़ना बड़े जनहित के लिए नुकसानदेह माना जाए। हरियाणा में LOC अक्सर इन मामलों में सामने आते हैं:

  • धोखाधड़ी, ठगी और आपराधिक विश्वासघात के मामले, जिनमें आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा जाँचे जाने वाले मामले भी शामिल हैं;
  • वैवाहिक विवाद, जहाँ पति या उसका परिवार विदेश में रहता या काम करता है;
  • बैंकों या कंपनियों से जुड़े बड़े लोन या निवेश विवाद;
  • ऐसे मामले जहाँ आरोपी जाँच में शामिल नहीं हुआ या अदालत में पेश नहीं हुआ।

अदालतों ने LOC के बारे में क्या कहा है

दिल्ली हाईकोर्ट सहित कई हाईकोर्टों ने कहा है कि LOC एक दबाव डालने वाला (coercive) कदम है और इसे रूटीन तरीके से जारी नहीं किया जा सकता। इन फ़ैसलों से निकलने वाले कुछ मोटे सिद्धांत ये हैं:

  • ठोस कारण होना चाहिए। LOC उस व्यक्ति के लिए है जो कानून से बचने की कोशिश कर सकता है, न कि उसके लिए जो जाँच में सहयोग कर रहा है और जब भी बुलाया जाए, पेश हो रहा है।
  • यह वसूली का साधन नहीं है। अदालतों ने बार-बार कहा है कि बैंक और लेनदार किसी व्यक्ति पर पैसा चुकाने का दबाव डालने के लिए LOC का इस्तेमाल नहीं कर सकते, खासकर जब धोखाधड़ी का कोई आरोप न हो। केवल पैसे का विवाद, अपने आप में, किसी को यात्रा से रोकने का आधार नहीं है।
  • सोच-समझकर फ़ैसला ज़रूरी है। LOC माँगने वाली एजेंसी को मामले के तथ्यों पर वास्तव में विचार करना चाहिए, न कि माँग को यंत्रवत आगे भेज देना चाहिए।
  • अदालत के आदेश मायने रखते हैं। जहाँ किसी आपराधिक अदालत ने जमानत दी है और विदेश जाने की अनुमति दी है, वहाँ अदालतों ने उस अनुमति को बेअसर करने के लिए LOC के इस्तेमाल की आलोचना की है।

MHA के ढाँचे में यह भी प्रावधान है कि LOC आमतौर पर जारी होने की तारीख से एक साल तक वैध रहता है, जब तक कि मूल एजेंसी इसे जारी रखने की माँग न करे। लेकिन व्यवहार में यह मानकर न चलें कि LOC खत्म हो गया है; इसकी जाँच सही माध्यम से करानी चाहिए।

अगर आपको एयरपोर्ट पर रोका जाए तो क्या करें

  1. शांत रहें और सहयोग करें। इमिग्रेशन अधिकारियों से बहस करने से कोई फ़ायदा नहीं होता; वे LOC में दिए निर्देशों के अनुसार काम करते हैं और खुद इसे रद्द नहीं कर सकते।
  2. पूछें कि LOC किस एजेंसी ने खुलवाया है। अधिकारी जानकारी दें या न दें, लेकिन अगर वे बताएँ कि इसके पीछे कौन-सा थाना, एजेंसी या बैंक है, तो उसे लिख लें।
  3. हर कागज़ संभालकर रखें। बोर्डिंग पास, टिकट, कोई लिखित नोट या मनाही की पर्ची रखें, और हो सके तो तारीख, समय और अधिकारियों के नाम दर्ज कर लें।
  4. एयरपोर्ट पर मामले के बारे में बयान न दें। अगर आपको रोककर पुलिस को सौंपा जाता है, तो गिरफ्तार व्यक्ति के रूप में आपके अधिकार लागू होते हैं, जिनमें गिरफ्तारी के आधार जानने और वकील से सलाह लेने का अधिकार शामिल है।
  5. असल मामले का पता लगाएँ। LOC लगभग हमेशा किसी FIR, शिकायत, अदालती मामले या बैंक विवाद से जुड़ा होता है। FIR नंबर, थाना और धाराएँ जानना आगे की हर कार्रवाई की कुंजी है।

LOC की समीक्षा कराने या इसे रद्द कराने के कानूनी रास्ते

1. मूल एजेंसी के पास जाएँ

क्योंकि LOC वापस लेने की माँग केवल मूल एजेंसी ही कर सकती है, इसलिए पहला कदम अक्सर उसे लिखित आवेदन (representation) देना होता है, जिसमें बताया जाए कि आप सहयोग कर रहे हैं, अपना पता और संपर्क विवरण दिया जाए, और जाँच में शामिल होने की पेशकश की जाए। अगर मामला निपट गया है, बंद हो गया है या उसमें समझौता हो गया है, तो यह दस्तावेज़ों के साथ बताया जाना चाहिए।

2. आपका मामला सुन रही आपराधिक अदालत में आवेदन करें

अगर आप जमानत पर हैं, तो आपके जमानत आदेश में यह शर्त हो सकती है कि आप अदालत की अनुमति के बिना भारत नहीं छोड़ेंगे। ऐसे में सही तरीका यह है कि उसी अदालत में यात्रा की अनुमति के लिए आवेदन करें, जिसमें यात्रा का उद्देश्य, तारीखें और कार्यक्रम बताएँ, और वापस लौटने का वचन (undertaking), ज़मानती (surety) या जमा राशि जैसी शर्तों की पेशकश करें। अदालत की अनुमति अपने आप इमिग्रेशन सिस्टम से LOC नहीं हटाती, इसलिए आदेश की जानकारी एजेंसी और इमिग्रेशन अधिकारियों को भी दी जानी चाहिए।

3. जहाँ ज़रूरी हो, पहले गिरफ्तारी से सुरक्षा लें

अगर अभी तक जमानत नहीं मिली है और आपको असल FIR में गिरफ्तारी का डर है, तो LOC का मुद्दा अक्सर अग्रिम जमानत (anticipatory bail) के आवेदन के साथ जुड़ा होता है। अदालत की सुरक्षा में जाँच में शामिल होना अक्सर वही चीज़ होती है जिससे LOC बनाए रखने का एजेंसी का बताया गया कारण खत्म हो जाता है।

4. पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में रिट याचिका

जहाँ LOC मनमाना, ज़रूरत से ज़्यादा सख्त या बिना कानूनी आधार के जारी किया गया लगे, जैसे केवल पैसे की वसूली वाले मामले में, वहाँ संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में इसे रद्द या स्थगित करने के लिए रिट याचिका दायर की जा सकती है। जहाँ समस्या खुद FIR में है, वहाँ FIR रद्द कराने की अलग याचिका पर भी विचार किया जा सकता है। आप इस वेबसाइट पर FIR रद्द कराने (FIR quashing) और EOW, धोखाधड़ी और ठगी के मामलों के बारे में और पढ़ सकते हैं।

किन गलतियों से बचें

  • पुलिस के नोटिस को इस उम्मीद में नज़रअंदाज़ करना कि मामला अपने आप खत्म हो जाएगा; जाँच में सहयोग न करना LOC माँगे जाने के सबसे आम कारणों में से एक है।
  • जमानत पर रहते हुए, पहले जमानत की शर्तें जाँचे बिना महँगी अंतरराष्ट्रीय यात्रा बुक कर लेना।
  • यह मान लेना कि शिकायतकर्ता से विवाद निपटा लेने पर LOC अपने आप हट जाता है। आमतौर पर ऐसा नहीं होता, जब तक एजेंसी या अदालत इस पर कार्रवाई न करे।
  • किसी दूसरे एयरपोर्ट या रास्ते से निकलने की कोशिश करना। इसे कानून से बचने की कोशिश माना जा सकता है और इससे आपके मामले को गंभीर नुकसान हो सकता है।
अधिवक्ता आशुतोष हंस अपनी स्थिति के बारे में कोई प्रश्न है? मामले की संक्षिप्त जानकारी और बात करने का सुविधाजनक समय बताएँ।

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और कानूनी सलाह नहीं है। कानून और उसकी व्याख्या बदलती रहती है; अपनी स्थिति पर सलाह के लिए संपर्क करें.